केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आयकर विभाग का आयकर अधिनियम, 2025 पर राष्ट्रव्यापी जागरूकता अभियान ‘प्रारंभ 2026’ लॉन्च किया
केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आयकर विभाग का आयकर अधिनियम, 2025 पर राष्ट्रव्यापी जागरूकता अभियान ‘प्रारंभ 2026’ लॉन्च किया केंद्रीय वित्त मंत्री ने एक नई, उपयोगकर्ता-अनुकूल आयकर वेबसाइट 2.0 का भी अनावरण किया वित्त मंत्री श्रीमती सीतारमण ने सहानुभूतिपूर्ण,...

केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आयकर विभाग का आयकर अधिनियम, 2025 पर राष्ट्रव्यापी जागरूकता अभियान ‘प्रारंभ 2026’ लॉन्च किया केंद्रीय वित्त मंत्री ने एक नई, उपयोगकर्ता-अनुकूल आयकर वेबसाइट 2.0 का भी अनावरण किया वित्त मंत्री श्रीमती सीतारमण ने सहानुभूतिपूर्ण, प्रौद्योगिकी-संचालित और विश्वास-आधारित कर प्रशासन का आह्वान किया, नए कर कानून में स्थिरता, सरलता और न्यूनतम संशोधनों की आवश्यकता पर भी जोर दिया राजस्व सचिव ने प्रारंभ 2026 आउटरीच के तहत क्षमता निर्माण और राष्ट्रव्यापी कार्यशालाओं पर प्रकाश डाला सीबीडीटी चेयरमैन ने ‘नागरिक देवो भव’ के सिद्धांत पर आधारित नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण पर जोर दिया ज्यादा लोगों तक पहुंचने और जागरूकता फैलाने के लिए, अंग्रेजी और हिंदी के अलावा 10 क्षेत्रीय भाषाओं में भी विस्तृत जानकारी वाले ब्रोशर जारी किए गए सीबीडीटी ने करदाताओं के मार्गदर्शन के लिए वीडियो, ब्रोशर और माईगॉव से जुड़ी पहल जैसी सामग्री भी जारी की नए कानून, नियमों और प्रपत्रों के बारे में करदाताओं की मदद के लिए एआई-आधारित चैटबॉट ‘कर साथी’ लॉन्च किया गया पूरे देश में करदाताओं की सहायता के लिए बहुभाषी संचार, डिजिटल टूल और आयकर सेवा केंद्र उपलब्ध होंगे नया आयकर अधिनियम, 2025, 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा प्रविष्टि तिथि: 20 MAR 2026 9:21PM by PIB Delhi केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज नई दिल्ली में ‘प्रारंभ (PRARAMBH) 2026’ लॉन्च किया, जो आयकर विभाग का ‘आयकर अधिनियम, 2025’ के बारे में देशव्यापी जागरूकता अभियान है। प्रिंट, रेडियो, टेलीविज़न, आउटडोर, डिजिटल और सोशल मीडिया तक फैला यह मल्टीमीडिया अभियान, नए अधिनियम की मुख्य विशेषताओं के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए तैयार किया गया है। यह अधिनियम 01.04.2026 से लागू होने वाला है। इस अभियान में रचनात्मक संचार की पहलें, आयकरदाताओं के लिए मार्गदर्शन करने वाली सामग्री (जैसे मार्गदर्शन नोट्स, शैक्षणिक वीडियो और ब्रोशर) और डिजिटल व ऑन-ग्राउंड प्लेटफॉर्म के जरिए बड़े पैमाने पर लोगों से जुड़ने के प्रयास शामिल हैं; इनमें 'माईगॉव (MyGov) क्विज' पहल भी शामिल है। केंद्रीय वित्त मंत्री ने विभाग के चल रहे डिजिटल बदलाव के प्रयासों के तहत 'इनकम टैक्स वेबसाइट 2.0' का भी उद्घाटन किया। इस अपग्रेड किए गए प्लेटफॉर्म को करदाताओं के लिए बेहतर उपयोगिता, आसान नेविगेशन और ज्यादा कुशल सेवा देने के लिए तैयार किया गया है। इस अवसर पर राजस्व विभाग, वित्त मंत्रालय में सचिव श्री अरविंद श्रीवास्तव; केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के चेयरमैन श्री रवि अग्रवाल; केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के चेयरमैन श्री विवेक चतुर्वेदी; सीबीडीटी और सीबीआईसी बोर्डों के सदस्य तथा विभाग के अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी उपस्थित थे। अपने मुख्य भाषण में, श्रीमती सीतारमण ने संसद में आयकर अधिनियम, 1961 के पारित होने की यात्रा का उल्लेख किया और इस दौरान राजस्व विभाग के अधिकारियों द्वारा किए गए असाधारण प्रयासों पर प्रकाश डाला। केंद्रीय वित्त मंत्री ने बताया कि "प्रारंभ" के तहत की गई पहलों सहित सीबीडीटी की सभी पहलें आयकर को सरल बनाने पर केंद्रित हैं और इनमें करदाताओं को दी जाने वाली सेवाओं पर विशेष ज़ोर दिया गया है। स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार, प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष, दोनों ही कर प्रणालियों में एक साथ व्यापक सुधार किए जा रहे हैं; यह बदलाव एक अधिक नागरिक-केंद्रित और जन-पहुंच उन्मुख प्रशासन की ओर बढ़ते कदम को दर्शाता है। श्रीमती सीतारमण ने इस बात पर प्रकाश डाला कि यह नया अधिनियम, जिसे व्यापक प्रयासों और विस्तृत परामर्श के बाद तैयार किया गया है, विभिन्न प्रावधानों को अधिक स्पष्टता के साथ पुनर्गठित करता है। इसका उद्देश्य विवादों को कम करना, नियमों के पालन में सुधार लाना और लोगों के रवैये को भ्रम व टालमटोल से हटाकर स्वीकार्यता व विश्वास की ओर ले जाना है। कानून जितने ही महत्वपूर्ण इस अधिनियम के प्रभावी कार्यान्वयन पर जोर देते हुए, केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि कर अधिकारी करदाताओं के सामने सरकार का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसलिए, उन्हें एक सहानुभूतिपूर्ण और विश्वास-आधारित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए, तथा मानवीय स्पर्श को बनाए रखते हुए, मानवीय हस्तक्षेप को कम करने के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाना चाहिए। आयकर विभाग द्वारा बहुभाषी पहुंच बनाने और डिजिटल मंचों का प्रभावी उपयोग करते हुए सरल भाषा में संवाद करने के प्रयासों की सराहना करते हुए, श्रीमती सीतारमण ने युवाओं और पेशेवरों के साथ जुड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया; इसमें एआई-आधारित समाधानों के लिए विभिन्न संस्थानों के साथ सहयोग करना भी शामिल है। केंद्रीय वित्त मंत्री ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के उस विजन-एम.ए.एन.ए.वी. के माध्यम से एक मानव-केंद्रित डिजिटल युग का निर्माण- को याद किया, जिसे उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित एआई शिखर सम्मेलन के दौरान प्रस्तुत किया था: एम: नैतिक और आचार-संबंधी प्रणालियां ए: जवाबदेह शासन एन: राष्ट्रीय संप्रभुता ए: सुलभ और समावेशी AI वी: वैध और न्यायसंगत प्रणालियां प्रधानमंत्री के इस विजन का हवाला देते हुए, श्रीमती सीतारमण ने इस बात को दोहराया कि आयकर अधिनियम, 2025 की नींव नैतिक और आचार-संबंधी प्रणालियों पर ही आधारित होनी चाहिए। केंद्रीय वित्त मंत्री ने अपने संबोधन का समापन करते हुए अतीत की तरह बार-बार बहुत ज्यादा संशोधन करने की प्रवृत्ति के प्रति आगाह किया। उन्होंने कहा कि नया कानून स्थिर, सरल और समझने में आसान होना चाहिए और इसमें तकनीक का इस्तेमाल इंसान-केंद्रित तरीके से किया जाना चाहिए। इसका अंतिम लक्ष्य एक ऐसी व्यवस्था बनाना है, जिसमें नियमों का पालन करना एक स्वाभाविक विकल्प बन जाए-जो आसान हो, स्पष्टता और भरोसे पर आधारित हो। अपने संबोधन में, राजस्व सचिव श्री अरविंद श्रीवास्तव ने कहा कि आयकर अधिनियम, 2025, केवल एक नया कानून ही नहीं है, बल्कि यह एक सरल, स्पष्ट और ज़्यादा उपयोगकर्ता-अनुकूल कर व्यवस्था की ओर एक सोच-समझकर उठाया गया कदम है। उन्होंने बताया कि नियमों और प्रपत्रों (फॉर्म) को एकरूप करने के साथ-साथ, विभाग ने अधिकारियों की क्षमता-निर्माण पर भी विशेष ध्यान दिया है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पूरे देश में अधिकारी करदाताओं की सहायता करने के लिए पूरी तरह से तैयार हों, क्योंकि जमीनी स्तर पर कानून को लागू करने का बहुत अधिक महत्व है। श्री श्रीवास्तव ने विभाग द्वारा एफएक्यू, ब्रोशर, मार्गदर्शन करने वाले नोट्स और क्षेत्रीय भाषाओं के संसाधनों के माध्यम से जानकारी की पहुंच बढ़ाने के लिए किए जा रहे महत्वपूर्ण प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने यह भी कहा कि संचार रणनीतियां अब ज्यादा सहज और समझने लायक हो गई हैं; इनमें डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके छोटे वीडियो के जरिए करदाताओं तक ऐसे तरीकों से पहुंचा जा रहा है जिनसे वे पहले से परिचित हैं। श्री श्रीवास्तव ने छात्रों के लिए शैक्षिक सामग्री के माध्यम से शुरुआती जागरूकता पैदा करने के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि देशव्यापी जागरूकता अभियान-जिसमें 300 से ज्यादा कार्यशाला शामिल हैं-न केवल जानकारी का प्रसार करेगा, बल्कि इसमें हितधारकों से सक्रिय रूप से फ़ीडबैक भी मांगा जाएगा। इससे यह सुधार एकतरफा संचार के बजाय एक निरंतर संवाद के रूप में मजबूत होगा। इस आउटरीच पहल के व्यापक दायरे को देखते हुए, श्री श्रीवास्तव ने कहा कि 'प्रारंभ 2026' (PRARAMBH 2026) केवल एक शुरुआत भर नहीं है, बल्कि यह एक अधिक खुली, जवाबदेह और सरल कर व्यवस्था की शुरुआत है। इससे पहले, अपने स्वागत भाषण में सीबीडीटी के चेयरमैन श्री रवि अग्रवाल ने कहा कि 'प्रारंभ' (PRARAMBH - मिशन विकसित भारत के लिए नीतिगत सुधार और जिम्मेदारी के साथ काम) 'नागरिक देवो भव' की भावना से प्रेरित है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि 'आयकर अधिनियम, 2025' भारत की कर प्रशासन यात्रा में एक महत्वपूर्ण कदम है, और इसे सुचारू
Source Verification
Corroboration Score: 1This story was independently reported by 1 sources. Click any source to read the original article.

